लोकतंत्र पर हमला: सूरजपुर में पत्रकारों को बंधक बनाकर पीटा, खदान क्षेत्र में खुली गुंडागर्दी
सूरजपुर | विशेष रिपोर्ट | 20 अप्रैल 2026
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां तीन पत्रकारों के साथ मारपीट, बंधक बनाकर प्रताड़ित करने और सबूत मिटाने की कोशिश की गई। यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता पर भी सीधा हमला मानी जा रही है।
कैसे शुरू हुआ मामला?
जानकारी के मुताबिक,
चंद्र प्रकाश साहू (संपादक, लोक विचार न्यूज़),
लोकेश गोस्वामी (संपादक, सीजी पब्लिक न्यूज़) और
मनीष जायसवाल (प्रदेश रिपोर्टर, सीजी वाल न्यूज़)
को भास्कर पारा स्थित कोयला खदान क्षेत्र में अनियमितताओं और स्थानीय विरोध की सूचना मिली थी। इसी आधार पर वे रविवार, 19 अप्रैल को मौके पर पहुंचे।
पत्रकार जब खदान के मुख्य गेट पहुंचे तो सुरक्षा गार्ड ने उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद उन्होंने आसपास के ग्रामीणों से बातचीत की और पास में बने अमृत सरोवर योजना के तहत तालाब और स्नान गृह का निरीक्षण किया।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
खदान के पीछे के हिस्से में लगे बोर्ड पर सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक ब्लास्टिंग का समय दर्ज था। इसके बावजूद मौके पर कई खामियां सामने आईं—
क्षेत्र में पर्याप्त फेंसिंग नहीं थी
चेतावनी बोर्ड सीमित थे
ग्रामीणों का आवागमन जारी था
यह स्थिति सुरक्षा मानकों की अनदेखी को दर्शाती है।
सड़क किनारे रिपोर्टिंग बनी “जुर्म”
पत्रकार खदान से करीब 200 मीटर दूर सार्वजनिक सड़क से वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे। इसी दौरान वहां मौजूद गार्ड और सुपरवाइजर ने उनसे बदसलूकी शुरू कर दी और रिपोर्टिंग रोकने का प्रयास किया।
अचानक हमला: बोलेरो में आए हमलावर

शाम करीब 4 बजे एक सफेद बोलेरो वाहन में 5-6 लोग मौके पर पहुंचे और बिना किसी चेतावनी के पत्रकारों पर हमला कर दिया।
हमले के दौरान—
कैमरा और माइक छीनकर फेंक दिए गए
मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए
गाली-गलौज और धक्का-मुक्की की गई
जमीन पर गिराकर बेरहमी से पिटाई की गई
चंद्र प्रकाश साहू को विशेष रूप से निशाना बनाया गया।
बंधक बनाकर खदान परिसर ले गए
हमले के बाद तीनों पत्रकारों को जबरन वाहन में बैठाकर खदान परिसर ले जाया गया। वहां—
आधार कार्ड और पहचान पत्र छीन लिए गए

उनकी फोटो खींची गई
जमीन पर बैठाकर पूछताछ की गई
बताया जा रहा है कि उन पर दबाव बनाकर यह कहलवाने की कोशिश की गई कि वे खदान में अवैध रूप से घुसे थे।
अपमान और धमकी
पूछताछ के दौरान पत्रकारों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया और धमकाया गया— “बड़े पत्रकार यहां आते हैं, पैसा लेकर चले जाते हैं… तुम जैसे छोटे पत्रकार यहां कैसे आ गए?”
करीब एक दर्जन सुरक्षा कर्मियों द्वारा उनके साथ मारपीट की गई।
3 से 4 घंटे तक कैद
तीनों पत्रकारों को लगभग 3-4 घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया। इस दौरान उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया और किसी से संपर्क नहीं करने दिया गया। शाम करीब 7 बजे उन्हें छोड़ा गया।

सबूत मिटाने की कोशिश
छोड़ने से पहले हमलावरों ने—
मोबाइल से सभी वीडियो फुटेज डिलीट कर दिए
उनकी कार को भी कब्जे में रखा
यह घटना सबूत मिटाने की सुनियोजित कोशिश की ओर इशारा करती है।
तबीयत बिगड़ी, फिर “दिखावटी राहत”
घटना के दौरान मनीष जायसवाल की तबीयत बिगड़ गई और उनका शुगर लेवल गिर गया, जिसके बाद उन्हें चाय दी गई।
उठे बड़े सवाल

यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है—
क्या पत्रकार अब जमीनी सच्चाई नहीं दिखा सकते?
क्या उद्योग क्षेत्रों में “नो रिपोर्टिंग ज़ोन” बना दिया गया है?
क्या सच उजागर करने वालों को इसी तरह दबाया जाएगा?
शिकायत और कार्रवाई की मांग
इस मामले में “हमर उत्थान सेवा समिति” द्वारा थाना झिलमिली में शिकायत दर्ज कराई गई है। मांग की गई है—
निष्पक्ष जांच
सभी आरोपियों की गिरफ्तारी
पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना
निष्कर्ष:
सूरजपुर की यह घटना केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा प्रहार है। यदि पत्रकार ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो जनता तक सच्चाई पहुंचना मुश्किल हो जाएगा। अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है—क्या दोषियों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे या मामला दबा दिया जाएगा।











