जिला महासमुंद — नंदलाल मिश्रा, ब्यूरो चीफ
एंकर — महासमुंद जिले के बसना क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं पवित्र स्थल गढ़फुलझर स्थित नानकसागर में आयोजित भव्य होला मोहल्ला कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष माथा टेककर आशीर्वाद लिया तथा विशेष कीर्तन समागम और अरदास में भाग लेकर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर सिख समाज की ओर से मुख्यमंत्री का सरोफा भेंट कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम में कृषि मंत्री रामविचार नेताम, बसना विधायक संपत अग्रवाल, डॉ. भगवान सिंह खोजी, ज्ञानी हरदीप सिंह, दविंदर सिंह, कमलजीत सिंह, नितिनदीप सिंह, कंवलप्रीत सिंह, अमृतपाल सिंह, देवेंद्र सिंह आनंद सहित सिख समाज के बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने उद्बोधन में कहा कि गढ़फुलझर की पावन भूमि स्थित नानकसागर अत्यंत पवित्र स्थल है, जहां पूज्य गुरु नानक देव जी के चरण पड़े हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ संतों की तपोभूमि रही है और यहां आकर उन्हें गर्व और आनंद की अनुभूति हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में गढ़फुलझर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा पहले ही की जा चुकी है, जिसके लिए लगभग 2.50 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है और विकास कार्य प्रगति पर है। उन्होंने अधिकारियों को कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश भी दिए।
बसना विधायक संपत अग्रवाल ने कहा कि सिख समाज हमेशा संगठित होकर समाज को साथ लेकर चलने वाला समाज रहा है। उन्होंने बताया कि गढ़फुलझर में अमृतसर की तर्ज पर एक भव्य गुरुद्वारा का निर्माण किया जाएगा, जिससे इस क्षेत्र की धार्मिक आस्था और पर्यटन को नई पहचान मिलेगी।

इस अवसर पर रिंकू सिंह ओबेरॉय ने बताया कि लगभग पांच वर्ष पहले यह तथ्य सामने आया कि करीब 520 वर्ष पूर्व सिखों के प्रथम गुरु गुरु नानक देव जी इस पवित्र स्थल पर पधारे थे। उन्होंने गुरु नानक देव जी के ऐतिहासिक आगमन और उनके उपदेशों के महत्व पर प्रकाश डाला।
उल्लेखनीय है कि बसना क्षेत्र का गढ़फुलझर वह ऐतिहासिक स्थल है जहां वर्ष 1506 में सिखों के प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी अपनी पहली उदासी (विश्व भ्रमण) के दौरान अमरकंटक और शिवरीनारायण के मार्ग से जगन्नाथ पुरी जाते समय दो दिनों तक ठहरे थे। उनके उपदेशों से प्रभावित होकर तत्कालीन आदिवासी राजा मानस राज सागर चंद भेना ने लगभग 5 एकड़ भूमि गुरु महाराज के नाम समर्पित की थी, जिसे आज भी “गुरुखाप” के नाम से जाना जाता है।

इसी पावन स्थल पर देश के प्रमुख गुरुद्वारों की तर्ज पर भव्य गुरुधाम के निर्माण का प्रस्ताव है। गढ़फुलझर न केवल सिख समाज की आस्था का केंद्र है, बल्कि सर्वधर्म समभाव की अनूठी मिसाल भी है। यहां अभेद किले, प्राचीन सुरंगों, रानी महल के अवशेषों के साथ रनेश्वर रामचंडी मंदिर और बूढ़ादेव मंदिर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी मौजूद हैं।
भव्य गुरुधाम के निर्माण के बाद यह क्षेत्र भविष्य में एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा तथा आने वाली पीढ़ियों को गुरु नानक देव जी के शांति, सेवा और भाईचारे के संदेश से प्रेरित करता रहेगा।











