सन 1970… पंजाब कांग्रेस के एक शहरी नेता थे, उनका नाम था सत्यपाल मित्तल। उनके तीन लड़के थे; राजन मित्तल, राकेश मित्तल ओर सुनील मित्तल।

सन 1970… पंजाब कांग्रेस के एक शहरी नेता थे, उनका नाम था सत्यपाल मित्तल। उनके तीन लड़के थे; राजन मित्तल, राकेश मित्तल ओर सुनील मित्तल।

दो लड़के कहीं नौकरी करते थे, लेकिन सुनील मित्तल लुधियाना में साइकिल बनाने वाली कंपनियों में कमीशन पर पार्ट सप्लाई, व साइकिल बनाने वाली सहायक इकाइ को कैश फ्लो के लिए ब्याज पर पैसा देने का काम करता था।

उसी दरम्यान उसके पिता सत्यपाल मित्तल कांग्रेस के राज्यसभा के सांसद बन जाते हैं।

पिता के कांग्रेस से सांसद बनने के बाद बेटा सुनील भारती मित्तल एक कंपनी बनाता है ‘भारतीय ओवरसीज ट्रेडिंग कंपनी’।

उस समय तक भारत में लोकल उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए, साइकिल के पार्ट्स इंपोर्ट करने पर 300% ड्यूटी का प्रावधान था, लेकिन इनकी फर्म को ड्यूटी में छूट दे दी गई और इन्होंने चाइना से साइकिल के पार्ट्स इंपोर्ट करके मोटा मुनाफा कमाया, और इनके इम्पोर्ट से लुधियाना में सैकड़ों छोटी छोटी साइकिल सहायक इकाइयाँ बंद हो गई।

उसके बाद: उस जमाने में भारत में बिजली बहुत कम रहती थी। भारत सरकार ने जनरेटर इंपोर्ट करने पर प्रतिबंध लगाया हुआ था। अब सेटिंग देखिये। अचानक पूरे भारत से सिर्फ एक फर्म को यानी भारती ओवरसीज को विदेश से जनरेटर इंपोर्ट करने का अनुमति दी जाती है।

फिर क्या था, सुनील मित्तल ने सुजुकी कंपनी के और होंडा के करोड़ों जनरेटर आयात करके मोटा मुनाफा कमाया। प्रसिद्ध TV सीरियलो के प्रसारण समय पर इनके इशारों पर बिजली गुल होती थी।

उसके बाद सुनील भारती मित्तल को बड़े उद्योगपति के रूप में देश में जाने लगे।

उस समय टेलिकॉम इंडस्ट्री पूरी तरह से सरकारी होती थी। इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज, यानी ITI ही टेलीफोन बनाती थी भारत में आप विदेश से टेलीफोन इंपोर्ट नहीं कर सकते थे।

पूरे भारत में सिर्फ लैंडलाइन फोन होता था, फोन भी सरकार देती थी और वह फोन कई किलो वजन का रोटरी डायल वाला होता था।

सेटिंग के चमत्कार से, अचानक सुनील भारती मित्तल को, ताइवान की कंपनी किंगटेल से पुश बटन वाले फोन आयात करने का लाइसेंस मिल जाता है और इतना ही नहीं, उनसे वह सारे ही फोन भारत सरकार का टेलीफोन विभाग खरीदने लगता है।

यानी आयात कर रहे थे सुनील भारती मित्तल, और खरीदार था भारत सरकार का टेलीफोन विभाग। पूरे भारत में इंडियन टेलीकॉम इंडस्ट्रीज की 12 से ज्यादा फैक्ट्रियां थी, लगभग बन्द जैसी हो गई। 15,00,000 कर्मचारी और अधिकारी थे उन्हें मुफ्त में सैलरी देती दी जाती रही, और सरकार विदेशी टेलीफोन सुनील भारती मित्तल से खरीद रही थी।

उसके बाद सुनील भारती मित्तल ने ताइवान की कंपनी किंगटेल के मदद से भारत में पुश बटन टेलीफोन बनाने की फैक्ट्री ही लगा ली और अपने फोन को BSNL & MTNL में सप्लाई करने लगे।

धीरे धीरे सरकारी कंपनी इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज बर्बाद हो गई, बंद हो गई।

अब जब उसी मरी हुई कंपनी को मोदी सरकार इसलिए बेच रही है कि वह कंपनी अब सरकार के गले में एक मरा हुआ हाथी है, तब सबसे पहले यही कांग्रेसी चिल्ला रहे हैं कि मोदी सरकार तो सरकारी कंपनी बेच रही है।

कांग्रेसी याद तो करो कि तुम्हारे ही कुकर्मों और भाई भतीजावाद से इन सरकारी नवरत्न कंपनियों की ये दुर्गति हुई हैं।

आज कांग्रेसी वामपंथी से लेकर राहुल गांधी और प्रियंका ईसाई वाड्रा “अंबानी अडानी” चिल्ला रहे हैं… जबकि गुजरात में बीजेपी के सत्ता में आने के पहले ही, अंबानी और अडानी खरबपति बन चुके थे

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