फंड का बहाना, रोजगार छिना – क्रेडा के 560 तकनीशियनों का भविष्य अंधकार में
रिपोर्टर प्रदीप नेताम
नारायणपुर चीफ ब्यूरो
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छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) में कार्यरत लगभग 560 सेवाकर्ता इकाइयों (क्लस्टर तकनीशियन) को अचानक कार्य से हटा दिए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। विपक्ष ने इस पूरे प्रकरण को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

विपक्ष का आरोप है कि जिन तकनीशियनों ने पिछले 10-12 वर्षों से प्रदेश में सौर ऊर्जा परियोजनाओं को जमीन पर उतारने में अहम भूमिका निभाई, आज उन्हीं को बिना पूर्व सूचना और बिना भुगतान के बाहर कर दिया गया है।
इन तकनीशियनों ने जल जीवन मिशन, सोलर ड्यूल पम्प, सोलर पावर प्लांट, सोलर हाई मस्ट, सोलर होम लाइट एवं सौर सुजला योजना जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के संचालन और रखरखाव का जिम्मा संभाला था। बावजूद इसके, मार्च 2026 तक का भुगतान रोके रखते हुए 1 अप्रैल 2026 से “फंड की कमी” का हवाला देकर कार्य बंद कर दिया गया।


विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह सरकार की असंवेदनशीलता और कुप्रबंधन का स्पष्ट उदाहरण है। एक ओर सरकार रोजगार देने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से कार्यरत तकनीशियनों को बेरोजगार कर उनके परिवारों को संकट में डाल दिया गया है।
तकनीशियनों का कहना है कि उनके सामने आज आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने सरकार से लंबित भुगतान जारी करने और पुनः कार्य पर बहाली की मांग की है।
विपक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मुद्दे पर समाधान नहीं निकाला गया, तो इसे लेकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा।











